Thursday, September 02, 2010

चेतना का प्रदूषण (Pollution of Awareness)


चेतना का प्रदूषण

चल-चित्र , टी. वी. वीडियो रेडियो, पत्र-पत्रिकाओं का व्यापार।
अश्लील साहित्यों, चित्रों, गीतों, दुखद खबरों की भरमार॥१॥

प्रदूषित सब प्रचार माध्यम, प्रदूषणमय सब संसार।
फिक्शन फैंटसी कामिक्सों से, भरा हुआ बाज़ार॥२॥

बढ रहा आतंक आन्दोलन, पनप रहा सबमें रोष।
प्रचार माध्यम का दुरूपयोग, फैला रहा जन-जन में असंतोष॥३॥

मानवी-चेतना का, हो रहा प्रतिक्षण ह्रास।
चेतना के प्रदूषण से, हो सकता उसका नास॥४।\

निर्मल चेतना से सहजयोग में, होगा प्रदूषण का अंत।
निर्मला-विद्या के प्रभाव से, बन जायेंगे विज्ञानी संत॥५॥

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Monday, January 04, 2010

Rich Text Editor

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Emancipation

Wednesday, September 16, 2009

Life is beautiful


जीवन बहुत सुन्दर है।
सुन्दरता से ही आनंद आता है।
इसीलिये जीवन ही आनंद है।
जीवन निरंतर प्रवाहित होता रहता है।
हर प्रवाह में मधुर संगीत सुनाई देता है।
आनंद भरा हर क्षण होता है।
रंग-बिरंगे फूलों से भरे जीवन महकता है।
जीवन देने वाले की कला का क्या कहना है।
जीवन का आनंद लेने इस धरती पर ही रहना है।
इस धरा को स्वर्ग बनाना है तो आकाश में क्यों जाना है?
धरती पर ही जीते हैं और उसी में समा जाते हैं।
जीवन का प्राँगण धरती माँ धरा के ही हम गुण गायें।
आओ इसके पर्यावरण की रक्षा करें और इसे ही सजायें।







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